Wo Shehre Mohabbat Jahan Mustafa Hai
Wo Shehre Mohabbat Jahan Mustafa hai ऐसी खूबसूरत नात है जिसमें लिखने वाले का जज़्बा-ए-मोहब्बत उसके एक-एक लफ्ज़ में बखूबी नज़र आता है।
और इसका हर मिसरा और हर लाइन मदीना शरीफ़ और हमारे प्यारे नबी करीम स.अ. की याद में डूबा हुआ है।
जिसको सुनने वाले की आँखें मदीने की ज़ियारत के शौक़ में नम हो जाती हैं, तो आइए हम भी ईमान ताज़ा करें।
Lyrics (Hindi)
वो शहरे मोहब्बत जहाँ मुस्तफा हैं वहीं घर बनाने को जी चाहता है।
वो सोने से कंकर, वो चांदी सी मिट्टी नज़र में बसाने को जी चाहता है।
वो शहरे मोहब्बत जहाँ मुस्तफ़ा हैं वहीं घर बनाने को जी चाहता है।
जो पूछा नबी ने कि कुछ घर पे छोड़ा?
तो सिद्दीक अकबर के होठों पे आया — वहाँ माल-ओ-दौलत की क्या है हकीकत!
जहाँ जान लुटाने को जी चाहता है।
जिहाद-ए-मोहब्बत की आवाज़ गूँजी — कहा हन्ज़ला ने ये दुल्हन से:
"अगर दो तो जाम-ए-शहादत लबों से लगाने को जी चाहता है।"
सितारों से ये चांद कहता है हर दम —
"तुम्हें क्या बताऊँ वो टुकड़ों का आलम… इशारे में आक़ा के इतना मज़ा था
कि फिर टूट जाने को जी चाहता है।"
वो नन्हा सा असगर, जो एड़ी रगड़ कर यही कह रहा था —
"ऐ बाबा! मैं पानी का प्यासा नहीं हूँ… मेरा रण में जाने को जी चाहता है।"
जो देखा है रू-ए-जमाल-ए-रिसालत — तो ताहिर उमर मुस्तफ़ा से बोले:
"बड़ी आपसे दुश्मनी थी मगर… अब गुलामी में आने को जी चाहता है।"
Hinglish Version (Hindi Pronunciation in English)
Wo shehre mohabbat jahan Mustafa hain, wahi ghar banane ko ji chahta hai.
Wo sone se kankar, wo chaandi si mitti nazar mein basane ko ji chahta hai.
Jo poocha Nabi ne, "Kuch ghar pe chhoda?"
To Siddiq-e-Akbar ke hothon pe aaya — “Yahan maal-o-daulat ki kya haqeeqat!
Jahan jaan lutaane ko ji chahta hai.”
Jihad-e-mohabbat ki aawaaz goonji — Hanzala ne dulhan se kaha:
“Agar ijazat do, to jaam-e-shahadat labon se lagane ko ji chahta hai.”
Sitaron se chand kehta hai har dam:
“Tumhein kya bataun wo tukdon ka aalam… Ishaare mein Aaqa ka itna maza tha
ki phir toot jaane ko ji chahta hai.”
Wo nanha sa Asgar, edi ragad kar keh raha tha:
“Ay Baba! Main paani ka pyasa nahi hoon… mera ran mein jaane ko ji chahta hai.”
Roo-e-jamal-e-risalat jab dekha — Tahir Umar bole:
“Badi aapse dushmani thi… magar ab gulaami mein aane ko ji chahta hai.”
Words Meaning (शब्दार्थ)
शहरे मोहब्बत — मोहब्बत का शहर, यानी मदीना शरीफ़।
मुस्तफ़ा — हज़रत मुहम्मद का मुबारक लक़ब।
मिट्टी — धरती / खाक।
सिद्दीक अकबर — हज़रत अबू बकर सिद्दीक रज़ि.
जिहाद-ए-मोहब्बत — मोहब्बत का संघर्ष, अल्लाह की राह में कुर्बानी।
जाम-ए-शहादत — शहादत का प्याला।
रू-ए-जमाल-ए-रिसालत — नबी के नूरानी चेहरे की ज़ियारत।
गुलामी में आना — इस्लाम कबूल करना।
टुकड़ों का आलम — चाँद के दो टुकड़े होने का मोजिज़ा।
नन्हा असगर — हज़रत अली असगर।
एड़ी रगड़ना — प्यास से तड़पना (कर्बला का वाक़ेआ)।